“माइक बनाम स्टेथोस्कोप का महामुकाबला, संवाद ने कराई सुलह – डॉक्टर साहब झुके, पत्रकार भाई चमके!”

“माइक बनाम स्टेथोस्कोप का महामुकाबला, संवाद ने कराई सुलह – डॉक्टर साहब झुके, पत्रकार भाई चमके!”
नजीबाबाद – सुबह से अस्पताल गेट पर धरना ऐसे जमा था जैसे बरसात में मेंढक। पत्रकार भाई अपनी “Breaking Pen” और “Mic Bomb” लिए तैयार बैठे थे, उधर डॉक्टर चहल का पारा ऐसा गरम था जैसे जून की दुपहरी।

पुलिस वाले भी समझ गए कि मामला सीरियस है – बोले “आप कहो तो FIR, आप कहो तो सॉरी, हम तो बस रजिस्टर पकड़ के खड़े हैं”।
इसी बीच ब्लॉक प्रमुख तपराज देशवाल बने “डॉक्टर साहब के प्रवक्ता” और मैसेज भिजवा दिया – “डॉक्टर साहब शर्मिंदा हैं, पत्रकारों से माफी मांगेंगे।”
अब भाई! पत्रकारों की एकता और कैमरे की चमक के आगे माफी न मांगे तो और क्या करें?

धरनास्थल पर तुरंत ‘एडिटोरियल मीटिंग’ बुलाई गई। तय हुआ – “चलो मामला प्रेम और संवाद से निपटा देते हैं, वरना स्टोरी हफ्ते भर तक वायरल हो जाएगी।”
डॉक्टर साहब आए, झुककर माफी मांगी और पत्रकारों ने दिखाया संयम। मानो कह रहे हों – “हम भी चाहें तो हर खबर को ‘ऑपरेशन थिएटर’ बना दें, लेकिन हमारा काम समाज को समझाना है, जलाना नहीं।”

👉 नतीजा ये निकला कि इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया –
“लोकतंत्र का चौथा स्तंभ जब एकजुट हो जाए तो बड़ी से बड़ी ‘सर्जरी’ भी बिना चीरफाड़ हो जाती है।”






