वाराणसी/उत्तरप्रदेशशहर

महिला शक्ति सुरक्षा कवच बनी: पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने आरटीसी में लिया हाईटेक सेफ्टी क्लास, एयरपोर्ट से लेकर काशी विश्वनाथ तक सुरक्षा की बारीक ट्रेनिंग”

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वाराणसी। पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी श्री मोहित अग्रवाल द्वारा आज दिनांक 04 फरवरी 2026 को आरटीसी/पुलिस लाइन वाराणसी में प्रशिक्षणाधीन महिला आरक्षियों के लिए एक विशेष सुरक्षा प्रशिक्षण क्लास आयोजित की गई। इस दौरान महिला प्रशिक्षुओं को प्रमुख प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था, आधुनिक संसाधनों के प्रयोग और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया के बारे में गहन प्रशिक्षण दिया गया।

पुलिस आयुक्त ने कहा कि एयरपोर्ट, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, रेलवे स्टेशन, ताज होटल, रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर जैसे संवेदनशील एवं अतिमहत्वपूर्ण स्थलों की सुरक्षा में महिला पुलिस की भूमिका अब पहले से कहीं अधिक अहम हो गई है। ऐसे में हर महिला आरक्षी को तकनीकी रूप से दक्ष, मानसिक रूप से सतर्क और व्यवहारिक रूप से अनुशासित होना आवश्यक है।

प्रमुख प्रतिष्ठानों की सुरक्षा पर विशेष फोकस

प्रशिक्षण के दौरान पुलिस आयुक्त ने महिला प्रशिक्षुओं को बताया कि किसी भी महत्वपूर्ण स्थल की सुरक्षा केवल हथियारों से नहीं, बल्कि सतर्क दृष्टि, सजग व्यवहार और त्वरित निर्णय क्षमता से मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी घटना का कारण बन सकती है, इसलिए हर पल चौकन्ना रहना जरूरी है।

HHMD और DFMD से मिलेगी हर खतरे पर पकड़

महिला प्रशिक्षुओं को HHMD (हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर) और DFMD (डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर) के प्रयोग की व्यावहारिक जानकारी दी गई। पुलिस आयुक्त ने बताया कि इन उपकरणों के माध्यम से संदिग्ध व्यक्तियों की जांच कर हथियार या विस्फोटक जैसी वस्तुओं को प्रवेश द्वार पर ही रोका जा सकता है, जिससे बड़ी घटनाओं को पहले ही टाला जा सकता है।

BDDS: बम से मुकाबले की पूरी रणनीति

पुलिस आयुक्त ने BDDS (बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वाड) की कार्यप्रणाली समझाते हुए बताया कि किसी भी संदिग्ध वस्तु की पहचान होने पर घेराबंदी, सूचना तंत्र और विशेषज्ञ टीम की त्वरित तैनाती बेहद जरूरी है। महिला प्रशिक्षुओं को यह भी सिखाया गया कि ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय प्रोटोकॉल के अनुसार शांत रहकर कार्रवाई करनी चाहिए।

PIDS, टायर किलर और एंटी-ड्रोन सिस्टम से हाईटेक सुरक्षा

प्रशिक्षण में PIDS (पेरिमीटर इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम) की उपयोगिता बताते हुए कहा गया कि यह बाहरी सीमा पर होने वाली घुसपैठ को तुरंत पकड़ लेता है।
वहीं टायर किलर सिस्टम से किसी भी संदिग्ध वाहन को सेकंडों में रोका जा सकता है।
इसके साथ ही एंटी-ड्रोन सिस्टम के जरिए ड्रोन गतिविधियों की पहचान, निगरानी और नियंत्रण कर आसमान से होने वाले संभावित खतरों पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

डॉग स्क्वाड, फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस की अहम भूमिका

पुलिस आयुक्त ने बताया कि डॉग स्क्वाड विस्फोटक खोजने में सबसे भरोसेमंद माध्यम है, विशेषकर भीड़भाड़ वाले इलाकों में।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस की त्वरित उपलब्धता जान-माल की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है और इनका रिस्पांस टाइम न्यूनतम होना चाहिए।

सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से हर मूवमेंट पर नजर

महिला प्रशिक्षुओं को बुलेट कैमरा, नाइट विजन, थर्मल कैमरा और ड्रोन कैमरा की उपयोगिता समझाई गई। पुलिस आयुक्त ने कहा कि आधुनिक कैमरे केवल निगरानी नहीं करते, बल्कि अपराध से पहले चेतावनी देने वाला सबसे मजबूत हथियार बन चुके हैं।

अनुशासन, व्यवहार और महिला सशक्तिकरण पर जोर

पुलिस आयुक्त ने महिला आरक्षियों से कहा कि अनुशासन, समयपालन और शालीन व्यवहार पुलिस की पहचान है। उन्होंने भरोसा जताया कि आज की महिला पुलिसकर्मी न केवल कानून व्यवस्था की रीढ़ हैं, बल्कि समाज में सुरक्षा और विश्वास की सबसे मजबूत प्रतीक बन रही हैं।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान सहायक पुलिस आयुक्त लाइन डॉ. ईशान सोनी, प्रतिसार निरीक्षक सहित पुलिस लाइन के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य महिला आरक्षियों को तकनीकी रूप से दक्ष, मानसिक रूप से मजबूत और व्यवहारिक रूप से तैयार कर भविष्य की हर चुनौती से निपटने के लिए सक्षम बनाना रहा।

Sallauddin Ali

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