वाराणसी/उत्तरप्रदेश

महाकवि जयशंकर प्रसाद की जयंती पर महाकवि जयशंकर प्रसाद साहित्य संस्कृति महोत्सव संपन्न

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वाराणसी :- काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.अजीत चतुर्वेदी ने महाकवि जयशंकर प्रसाद की जयंती पर महाकवि जयशंकर प्रसाद साहित्य संस्कृति महोत्सव का उनके निवास प्रसाद मन्दिर में उद्घाटन किया | कुलपति प्रो.अजीत चतुर्वेदी ने इस अवसर पर कहा कि यह समारोह प्रसाद जी की कृतियों,उनके साहित्य,उनकी धरोहर को सँजोकर आने वाली पीढ़ी को अवगत कराने का एक सशक्त माध्यम है | प्रसाद की जयंती में शामिल होना एक तीर्थ यात्रा में शामिल होना जैसा है समाज की निरंतरता बनाये रखने के लिए साहित्य की बहुत बड़ी उपयोगिता है | साहित्य एक ऐसी विधा है जिसमें समाज का हर तत्व शामिल है चाहे वह विज्ञान हो,कला हो या अन्य कोई तत्व उन्होंने जयंती समारोह को साहित्य जगत को एक नई दिशा देने वाला बताया उन्होंने प्रसाद साहित्य पर और अधिक शोध कार्य किये जाने पर बल दिया | काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अवधेश प्रधान ने कहा कि प्रसाद की कृतियों में बहुत ही बारीकी,बहुत ही शालीनता और बहुत ही गांभीर्य था उनकी रचनाओं में बहुत ही शालीनता तो थी लेकिन ओजस्विता से पूर्ण थी उनकी दृष्टि एक अनासक्ति मानव की दृष्टि थी जो उन्हें मानव से महामानव की ऊंचाइयों तक पहुँचाती है |

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर प्रभात मिश्र ने कहा कि प्रसाद ने अपनी साहित्य में जिन विषयों को उद्धरित किया उसकी जितनी प्रासंगिकता उस समय थी उससे अधिक आज के समय में हो गयी है उन्होंने कहा कि प्रसाद के रचना क्रम में एक व्यवस्थित स्वरूप है उनकी काव्य यात्रा एक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ती है उनके उत्तराधिकारी के रूप में आज तक कोई और नहीं आ सका है | प्रोफेसर सुमन जैन ने कहा कि जयंती समारोह के जरिये प्रसाद का साहित्य आम पाठकों से जुड़ने का भी बहुत ही प्रभावकारी माध्यम बनेगा | काशी के साहित्यकारों में दो ही हिमालयी साहित्यकार हुए हैं उनमें पहले तुलसीदास और दूसरे जयशंकर प्रसाद हैं | प्रसाद ने अपने साहित्य में स्त्री समस्याओं को भी बड़ी बारीकी से उठाया है |

बस्ती से आये साहित्यकार श्री अष्टभुजा शुक्ल ने कहा कि पूरे विश्व के हिन्दी साहित्य में 50 प्रतिशत योगदान काशी के साहित्यकारों का ही है | काशी की हिन्दी साहित्य ने पूरे देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनियाँ में अपना परचम लहराया है | प्रसाद ने कामायनी के रूप में दुनियाँ में हिन्दी साहित्य को एक ऐसा उपहार दिया है जिसे सदियों तक याद रखा जाएगा | कामायनी जीवन की सच्चाई की वह कहानी है जिसे जल के विभिन्न रूपों के माध्यम से महाकवि ने साहित्य जगत को दिया है |

समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ इंदीवर ने कहा कि प्रसाद युग प्रवर्तक साहित्यकार थे छायावाद की त्रयी बनाने में उनकी भूमिका सर्वोपरि थी | प्रसाद जी की साहित्यिक बहुमुखी प्रतिभा चमत्कृत करने वाली थी |

समारोह में मुख्य रूप से वरिष्ठ साहित्यकार डॉ दयानिधि मिश्र,हिमांशु उपाध्याय,डॉ कवीन्द्र नारायण,सुरेंद्र वाजपेयी,गौतम अरोड़ा सहित भारी संख्या में प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे | साहित्यकारों, प्रबुद्ध जनों और आगंतुकों का जयशंकर प्रसाद की प्रपौत्री और संयोजक डॉ कविता प्रसाद ने स्वागत किया | कार्यक्रम का संचालन डॉ राम सुधार सिंह ने किया, अवधेश प्रसाद ने धन्यवाद दिया |

जयंती समारोह के बाद एक भव्य संगीत कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें काशी के ख्यात कलाकार,पद्मश्री देवब्रत मिश्र ने अपना सितार वादन प्रस्तुत किया और सुचरिता गुप्ता ने अपना गायन प्रस्तुति दी साथ में जयपुर से आई विजय लक्ष्मी और डॉ अपर्णा मक्कर ने प्रसाद जी के काव्य पर नृत्य प्रस्तुति दी ||

Sallauddin Ali

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