भारत रंग महोत्सव में संस्कृत नाट्य परंपरा की सशक्त प्रस्तुति

‘मालतीमाधवम्’ का सफल मंचन नागरी नाटक मंडली प्रेक्षागृह में
वाराणसी:- राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के वाराणसी केंद्र के विद्यार्थियों द्वारा महाकवि भवभूति रचित संस्कृत नाटक मालतीमाधवम् का भव्य और सफल मंचन वाराणसी के नागरी नाटक मंडली प्रेक्षागृह में संपन्न हुआ | यह प्रस्तुति 25वें भारत रंग महोत्सव के अंतर्गत आयोजित की गई जिसे विश्व का सबसे बड़ा रंगमंच महोत्सव माना जाता है | नाटक का निर्देशन विवेक एम्मानेनी,सहायक प्राध्यापक,शास्त्रीय भारतीय नाट्य,राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा किया गया | संगीत संयोजन अजय कुमार ने किया जबकि परिधान परिकल्पना स्वाति दुबे की रही | प्रकाश,मंच सज्जा तथा सहायक निर्देशन की ज़िम्मेदारी गुंजन शुक्ला ने निभाई, प्रस्तुति में एनएसडी वाराणसी केंद्र के छात्र कलाकारों ने सशक्त और अनुशासित अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया |
भारत रंग महोत्सव एक माह से अधिक अवधि तक चलने वाला अंतरराष्ट्रीय आयोजन रहा जिसमें 228 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियां शामिल रहीं | इस वर्ष महोत्सव में लुप्तप्राय और विलुप्त होती कला परंपराओं की विशेष प्रस्तुतियां भी प्रस्तुत की गईं | कुल 277 प्रस्तुतियों में बाल रंगमंच और जन जातीय रंगमंच की भागीदारी ने महोत्सव को व्यापक और समावेशी स्वरूप प्रदान किया |
नाटक का संक्षिप्त कथासार
मालती माधवम् प्रेम,त्याग और धर्म के संघर्ष को केंद्र में रखता है | उज्जयिनी के मंत्री देवरात की पुत्री मालती और विदर्भ के मंत्री कमंदकी के शिष्य माधव के बीच जन्मा प्रेम सत्ता और षड्यंत्रों से टकराता है | नायिका की बलि तक का षड्यंत्र रचा जाता है किंतु करुणा,मित्रता और धर्म की विजय होती है और प्रेम अपना मार्ग प्राप्त करता है नाटक में शृंगार और करुण रस की सशक्त अभिव्यक्ति संस्कृत नाट्य परंपरा की गरिमा को उभारती है |
सशक्त संगीत,संतुलित प्रकाश रचना और पारंपरिक मंच कल्पना के साथ मालती माधवम् का यह मंचन भारत रंग महोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा और दर्शकों से सराहना प्राप्त की ||






