उत्तरप्रदेश

बेटी जिसके आंगन में आती है एक मुक्कमल उजाला लाती है -कवि सम्मेलन में हुआ गोपाल मोहन शर्मा का अभिनन्दन

WhatsApp Image 2025-09-22 at 11.03.20
previous arrow
next arrow


इन्तिजार अहमद खान
इटावा। महेवा विकासखंड के ग्राम नगला शिवसिंह में प्रकाश मिश्रा, एडवोकेट संतोष सिंह, एडवोकेट शिवम चौहान के संयोजन में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया।
जय सिंह चौहान की अध्यक्षता तथा राष्ट्रीय कवि अशोक यादव पूर्व मंत्री की उपस्थिति मे आयोजित कवि सम्मेलन का फीता काट कर भाजपा पूर्व जिला अध्यक्ष गोपाल मोहन शर्मा ने शुभारंभ किया । श्री शर्मा ने काव्य शक्ति को समाज का दर्पण बताया जिस साहित्य की कड़ियों की श्रृंखला मानवता को खड़ा करने की प्रेरणा देती हैं। अदभुत साहित्य सृजन उस राह को खोजता है जिस राह पर काले कारनामों की बारात निकलती है। उन्होंने कहा कि परिश्रम पर पूजी, और तपस्वी कालों पर मात्र सुंदर गोरे मुखौटे, न्याय पर अन्याय की, पात्र पर अपात्रता का जब जश्न मनने लगता है तब साहित्यकार और कलमकार बीती रात्रि में जब दुनिया सोती है तब वह शब्दों की खोज करता हुआ कलम की धार से उस खरपतवार को नष्ट करता है जिसके कारण ठहरने बाला श्रम विकसित होने वाला विवेक की गति रुकती है तव वह फौलादी नींव रखकर शातिराने ढंग से कमाई ग़यी पूजी व सफलता के ढांचे को चूर चूर करता है। साहित्यकार तलवार से नहीं शब्दों के सृजन से गांव गरीब श्रम वास्तविकता पात्रता का चयन करता हुआ नया आविष्कार करता है। मुख्य अतिथि भाजपा पूर्व जिला अध्यक्ष गोपाल मोहन शर्मा का कार्यक्रम अध्यक्ष जय सिंह चौहान तथा प्रमुख आयोजक प्रकाश मिश्रा द्वारा बैज लगाकर, अंग वस्त्र से सम्मानित किया गया। कवि अशोक यादव, रोहित चौधरी, सुनील अवस्थी, शिवगोपाल अवस्थी, हरीबाबू निराला भिंड, प्रतीक्षा, प्रशांत तिवारी, हर्ष शर्मा, मंजू यादव का भी अंग वस्त्र से स्वागत किया गया। कवि अशोक यादव ने रचना पढ़ते हुए कहा कि बेटी जिसके आंगन में आती है एक मुक्कमल उजाला लाती है।।भूल जाता हूं सारे रजों गम जब वो हंसती है मुस्कुराती है। कवि सुनील अवस्थी ने कहा कि जब तक तन में सांस रहेगी बंदे मातरम गाऊंगा।
कवि शिव गोपाल अवस्थी ने कहा कि बुजुर्गो कि जमीन बेचकर धनवान मत होना, पलायन करके अपने गांव की पहचान मत खोना।
कवि हरीबाबू निराला ने कहा कि बालम हम समझावे तुमको प्रधानी ना लड़ियों,बड़े आदमिय न की बाते है चक्कर में ना पड़ईयो। कवियत्री प्रतीक्षा ने कहा कि “काठ की पुतली बनाना चाहते है जिस तरह चाहे चलाना चाहते हैं। कवि प्रशांत तिवारी ने कहा कि “इन पलकों पर नीद लिखी है कागज पर उम्मीद लिखी है।।कवि हर्ष शर्मा ने कहा कल भी रोया था कई दिनों के बाद, अब में लिख सकता हूं आंसू जिंदाबाद। कवियत्री मंजू यादव ने कहा कि सबकी आहों में असर हो ये जरूरी तो नहीं, जिदगी सुख में बसर हो ये जरूरी तो नहीं।। काब्य मंच का वीर रस हंसी ठहाको के साथ जोशीले तेवरों में कवि रोहित चौधरी के द्वारा सफल संचालन किया गया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से डॉ संजय दीक्षित, श्याम त्रिपाठी, लोकेंद्र चौहान, तरुण तिवारी, ऋषि शुक्ला, सुनील मिश्रा, रामनरेश यादव सहित सैकड़ो गणमान्य जन मौजूद रहे।

Sallauddin Ali

50% LikesVS
50% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
close