काशीपुर-उत्तराखण्ड़

बुज़ुर्ग हमारी धरोहर, इनको मिलना चाहिए वास्तविक सम्मान – उर्वशी दत्त बाली

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काशीपुर / उत्तराखंड (रिज़वान अहसन ),,,,आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में हम अक्सर यह भूल जाते हैं कि एक दिन हम भी बुज़ुर्ग होंगे। हमारे हाथ कमजोर हो जाएंगे, कदम धीमे पड़ जाएंगे, आंखों की रोशनी धुंधली हो जाएगी। समय किसी को नहीं छोड़ता। बड़े-बड़े सितारे, जिनकी एक झलक पाने के लिए लोग तरसते थे, वे भी उम्र के साथ कमजोर हो जाते हैं। जीवन में एक ऐसा समय अवश्य आता है जब हर इंसान को किसी और के सहारे की आवश्यकता होती है। इसलिए यदि आज हम किसी का सहारा बन सकते हैं, तो बन जाना चाहिए, क्योंकि समय का चक्र अवश्य घूमता है।
बुज़ुर्ग हमारे परिवार और समाज की वह अमूल्य धरोहर हैं जिन्होंने जीवन के संघर्ष, सफलता, दुख और खुशियों के हर रंग को जिया है। आज जब वे जीवन की अंतिम सीढ़ी पर खड़े हैं, तो उनका शरीर भले ही थक जाता है, पर उनका मन अब भी अपने परिवार के साथ हर खुशी में शामिल होने को आतुर रहता है। घर में विवाह हो, त्यौहार हो या कोई उत्सव, अक्सर देखा जाता है कि शरीर की कमजोरी के कारण कुछ बुजुर्ग एक कोने में शांत बैठे रहते हैं। वे सब कुछ देखते हैं, सुनते हैं, महसूस करते हैं, पर कई बार कुछ परिजनउनके पास बैठकर यह नहीं पूछते कि उन्हें कैसा लग रहा है या वे क्या सोच रहे हैं?
बड़ा अच्छा लगता है यह देख कर कि कुछ लोग अपने घर में बुजुर्गों को सर पर सजा कर रखते है, घर की शान समझते हैं,हर चीज में सलाह ले ले कर चलते हैं,,,
लेकिन कुछ लोग अपनी व्यस्त दिनचर्या में उन्हें साथ बिठाना,काम में सलाह लेना, शादी त्योहार में शॉपिंग पर ले जाना,या शॉपिंग दिखाना या किसी निर्णय में उनकी सलाह लेना भूल जाते हैं। भले ही उनकी हर सलाह पर अमल न किया जाए, पर उनसे सलाह लेने मात्र से उनका सम्मान कई गुना बढ़ जाता है। उन्हें यह एहसास होता है कि वे आज भी परिवार के केंद्र में हैं, न कि दर्शक ।इस पड़ाव पर कुछ ज्यादा ज़रूरतें नहीं होती उनकी जिंदगी की, वे केवल इतना चाहते हैं कि परिवार की खुशियाँ उनके साथ साझा की जाएँ। यदि उन्हें छोटी-सी जिम्मेदारी भी दे दी जाए और हर तैयारी में शामिल किया जाए, तो उन्हें अपने अस्तित्व का महत्व महसूस होता है। उनकी उपस्थिति ही घर की सबसे बड़ी शक्ति है।
आज हम जीवन की दौड़ में आगे हैं, पर कल हम भी उसी स्थान पर खड़े हो सकते हैं। तब हमें भी यही अपेक्षा होगी कि हमारे अपने हमें पीछे नहीं, अपने साथ रखें। अतः आवश्यक है कि हम हर अवसर, हर उत्सव और हर निर्णय में बुज़ुर्गों को सम्मानपूर्वक स्थान दें। उनकी मुस्कान घर की वास्तविक रौनक है और उनका आशीर्वाद हर सफलता की सबसे बड़ी पूंजी।

RIZWAN AHSAN

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