वाराणसी/उत्तरप्रदेश

बीएचयू स्किल सेंटर में चिकित्सकों को सम्मान, जनस्वास्थ्य आपात तैयारी पर जोर

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वाराणसी, 13.02.2026: कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने शुक्रवार को सर्जिकल स्किल लैब (NELS), ट्रॉमा सेंटर, चिकित्सा विज्ञान संस्थान (जिसे स्किल सेंटर भी कहा जाता है) का दौरा किया और केंद्र में आयोजित कार्यक्रमों एवं व्याख्यानों में भाग लेने वाले संकाय सदस्यों को सम्मानित किया। स्किल सेंटर अपनी तरह का एक अनूठा केंद्र है, जिसका उद्देश्य अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए वर्तमान चिकित्सा पद्धति में आवश्यक नई पीढ़ी के कौशलों से बीएचयू के चिकित्सकों को सुसज्जित करना है। वर्तमान में केंद्र में अस्पताल प्रशासकों के लिए “जनस्वास्थ्य आपात स्थितियों के प्रबंधन” विषय पर एक कौशल निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने जनस्वास्थ्य आपात स्थितियों की बढ़ती आवृत्ति जैसे सामूहिक डूबने की घटनाएँ, पुल गिरने की घटनाएँ और बड़े सड़क हादसे पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि ट्रॉमा सेंटर को अक्सर गंभीर रूप से घायल मरीजों की अचानक बड़ी संख्या का सामना करना पड़ता है और ऐसी परिस्थितियों में परिजनों के बीच घबराहट तथा त्वरित नैदानिक निर्णय लेने में अनिश्चितता जीवन के लिए घातक सिद्ध हो सकती है। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रभावी प्रतिक्रिया केवल ज्ञान या तकनीकी कौशल पर नहीं, बल्कि तत्परता, और जीवन के संकट के क्षणों में निर्णायक कार्रवाई करने की क्षमता पर अधिक निर्भर करती है। संस्थान के चिकित्सकों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “केवल वाराणसी ही नहीं, बल्कि पूरा उत्तर प्रदेश बीएचयू को एक अग्रणी के रूप में देखता है।” उन्होंने बीएचयू के चिकित्सकों पर विश्वास व्यक्त करते हुए उनके समर्पण और चिकित्सकीय दक्षता की प्रशंसा की। साथ ही, उन्होंने स्किल सेंटर को व्यापक जनसंपर्क दृष्टिकोण अपनाने और विद्यालयों, महाविद्यालयों, शॉपिंग मॉल तथा छोटे अस्पतालों में नियमित भ्रमण सहित गतिविधियों का वार्षिक कैलेंडर विकसित करने का सुझाव दिया, ताकि बुनियादी जीवन-रक्षक कौशलों का प्रदर्शन कर जनजागरूकता को सुदृढ़ किया जा सके।
कार्यक्रम की समन्वयक एवं नोडल ऑफ़िसर प्रो. कविता मीणा ने स्किल सेंटर के विभिन्न पाठ्यक्रमों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सुविधाओं, चल रहे विकास कार्यों तथा अब तक की उपलब्धियों को बताया। उन्होंने विश्वविद्यालय भर में संचालित बेसिक लाइफ सपोर्ट प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) पहलों तथा नेशनल इमरजेंसी लाइफ सपोर्ट पहल पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि केंद्र अपने कई कार्यक्रमों के लिए भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ सहयोग में कार्य कर रहा है। संस्थान स्किल सेंटर में एक वर्चुअल रियलिटी (VR) कक्ष भी विकसित कर रहा है, जिससे संकट कि स्थिति, युद्ध जैसी परिस्थिति और अन्य समान अवसरों के लिए चिकित्सकों की बेहतर तैयारी हेतु इमर्सिव सिमुलेशन निर्मित किए जा सकें। प्रो. मीणा ने कहा कि केंद्र अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप स्वदेशी प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और आपदा प्रतिक्रिया तैयारी को सुदृढ़ कर रहा है।
कुलपति ने केंद्र में उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं का निरीक्षण किया तथा उपलब्ध संसाधनों और संभावित सुधार की संभावनाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने केंद्र के स्किल स्टेशनों का भी अवलोकन किया, जो चिकित्सकों के कौशल निर्माण कार्यक्रमों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। चिकित्सा प्रशिक्षण हेतु मैनिकिन, अल्ट्रासोनोग्राफी मशीनें, सिमुलेशन उपकरण तथा PNDT-अनुपालक उपकरण स्किल स्टेशनों में उपलब्ध हैं, जो स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए सुगम शिक्षण सुनिश्चित करते हैं। केंद्र में रोगी प्रबंधन, IV कैन्युलेशन और द्रव गणना, इंट्यूबेशन, कार्डियक अरेस्ट प्रबंधन, एसाइटिस (उदर में द्रव), बाल चिकित्सा देखभाल तथा महिला ऑपरेटिव-सम्बंधित देखभाल (जिसमें आघात और विषाक्तता प्रबंधन शामिल है) का प्रशिक्षण उपलब्ध है।

Sallauddin Ali

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