बीएचयू मेंअंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस पर कार्यक्रम आयोजित

वाराणसी, 13.02.2026: बालचिकित्सा हेमेटोलॉजी ऑन्कोलॉजी/बीएमटी प्रभाग, बाल रोग विभाग,चिकित्साविज्ञान संस्थान बीएचयू ने शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस के अवसर परएक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।जिसमें काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपतिप्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने सेंटर फॉर बोन मैरो ट्रॉसप्लान्ट स्थित पीडियाट्रिकयुनिट में एक नए पीडियाट्रिक प्ले रूम का उद्घाटन किया।अपने संबोधन में, प्रो.चतुर्वेदी ने केंद्र के विकास में योगदान देने वाले चिकित्सकों के कठिन परिश्रम कीसराहना की और इस महत्वपूर्ण उपलब्धि तक पहुँचने पर चिकित्सा विज्ञान संस्थान कोबधाई दी। उन्होंने उल्लेख किया कि यह उपलब्धि संस्थान की सामूहिक प्रतिबद्धता,सततप्रयास और चिकित्सा विज्ञान में प्रगति को दर्शाती है। कुलपति ने चिकित्सकों औरविशेषज्ञों से आग्रह किया कि वे स्टेम सेल अनुसंधान, थैलेसीमियाउपचार, कार-टी सेल थेरेपी और उन्नत अनुसंधान जैसी पहलों के लिए चरणबद्धकार्य योजना तैयार करके केंद्र की क्षमता का अधिकतम उपयोग करें। उन्होंने सभी को आश्वस्त किया कि विश्वविद्यालय आवश्यकसंसाधन, उपकरण और मानव संसाधन प्रदान करने में पूर्ण समर्थन देगा।प्रो. चतुर्वेदी ने यह जोर देते हुएकहा कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में तीव्र प्रगति ने कई लाइलाज बीमारियों को उपचारयोग्य बना दिया है। उन्होंने आमजन को गंभीर बीमारियों के लिए उन्नत चिकित्साकेंद्रों में समय पर उपचार लेने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि बेहतर उपचार परिणामसुनिश्चित हो सकें। प्रो. चतुर्वेदी ने कहा, “समाज को समझनेकी आवश्यकता है कि ये बीमारियाँ अब लाइलाज नहीं हैं और बीएचयू विश्वस्तरीय उपचारप्रदान करता है।” उन्होंने भविष्य की चिकित्सा के प्रति आशाव्यक्त करते हुए प्रस्ताव रखा कि अगले वर्ष का कार्यक्रम अधिक सफल बनाने के लिएबड़े स्थल पर आयोजित किया जाए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इन कार्यक्रमों कावास्तविक मूल उद्देश्य “लाइलाज” बीमारियों के भयसे लोगों को मुक्त करना है। अंत में, उन्होंने मरीजों के परिवारों को उनकेसाहस के लिए बधाई दी और उनसे आग्रह किया कि वे यह संदेश साझा करें कि उन्नतअनुसंधान और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के माध्यम से, जो बीमारियाँकभी लाइलाज थीं, अब उन पर विजय प्राप्त की जा रही है।अपने उद्बोधन में प्रो. एस. एन. संखवार,निदेशक,चिकित्साविज्ञान संस्थान, ने कहा कि ऐसे जटिल चिकित्सीय चुनौतियों के बीचयह केंद्र दृढ़ता और आशा के स्तंभ के रूप में खड़ा है उन्होने ने समूची टीम केसमर्पण के लिए अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।प्रो. संजय गुप्ता, संकायप्रमुख, आधुनिक चिकित्सा संकाय, ने कहा कि “बीस वर्ष पहले,कैंसरका निदान भय उत्पन्न करता था क्योंकि उपचार के विकल्प सीमित थे। आज, हमइस लड़ाई को जीत रहे हैं। इसका श्रेय रोगियों और उनके परिजनों की अदम्य इच्छाशक्तिको जाता है।प्रो. सौरभ सिंह, आचार्यप्रभारी, ट्रॉमा सेंटर, आईएमएस, ने श्रोताओं कोआश्वस्त किया कि विश्वविद्यालय और सरकारी सुविधाएँ जनता की सेवा के लिए समर्पितहैं। उन्होंने जोर दिया कि सर्वोत्तम देखभाल सुनिश्चित करने के लिए वे हर उपलब्धसंसाधन का उपयोग करेंगे।प्रो. मनोज पांडेय, संकायप्रमुख, अनुसंधान, चिकित्सा विज्ञान संस्थान ने बोन मैरो और स्टेमसेल अनुसंधान केंद्र को ऊँचाई तक ले जाने के मिशन पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि “सामान्यबाल घातक रोगों, ट्यूमर और जर्म सेल ट्यूमर के उपचार के लिए बोनमैरो प्रत्यारोपण अत्यंत आवश्यक है।”प्रो. अंकुर सिंह, विभागाध्यक्ष,बालरोग विभाग, ने गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया और कहा किहमारा ध्यान चार स्तंभों पर बना हुआ है: संकल्प, सोच, साहसऔर साधन।”कार्यक्रम की समन्वयक प्रो. विनीतागुप्ता, बाल रोग विभाग, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, अपनेसंबोधन में उन्होंने बताया कि यह केंद्र पूर्वांचल क्षेत्र में बच्चों केप्रत्यारोपण प्रदान करने वाली एकमात्र सरकारी संस्थान है, जहाँ अब तक 38प्रत्यारोपण पूरे किए जा चुके हैं, जिनमें 9 एलोजेनिकप्रत्यारोपण शामिल हैं।बाल चिकित्सा हेमेटोलॉजी, ऑन्कोलॉजीएवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) प्रभाग, चिकित्साविज्ञान संस्थान (आईएमएस-बीएचयू), घातक और अघातक दोनों प्रकार कीस्थितियों के लिए उपचार प्रदान करता है, जिनमें एक्यूट लिम्फोब्लास्टिकल्यूकेमिया, न्यूरोब्लास्टोमा, एप्लास्टिकएनीमिया और विल्म्स ट्यूमर शामिल हैं, तथा बाल, हेमेटोलॉजिकल औरऑन्कोलॉजिकल विकारों के लिए व्यापक सेवाएँ उपलब्ध कराता है।इस कार्यक्रम में 40बच्चों ने भाग लिया, जिनमें से आठ सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण करा चुकेहैं, जबकि अन्य वर्तमान में कीमोथेरेपी और अन्य उपचारों से गुजर रहे हैं।प्रत्यारोपण से उबर चुके बच्चों और उनके दाताओं को प्रो. चतुर्वेदी, प्रो.संखवार, प्रो. गुप्ता, प्रो. सौरभ सिंह और प्रो. अंकुर सिंहद्वारा प्रमाणपत्र वितरित किए गया। इसके अतिरिक्त, यह प्रभाग कईगैर-सरकारी संगठनों, जिनमें ‘मेक-ए-विशफाउंडेशन’ शामिल है, के साथ संबद्ध रहा है, जिसे विशेष रूपसे ल्यूकेमिया और सीएमएल से जूझ रहे बच्चों के प्रति उसकी करुणामय सेवा के लिएधन्यवाद दिया गया।कार्यक्रम का समापन डॉ. प्रियंकाअग्रवाल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
























