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बिजनौर मेडिकल कॉलेज भर्ती घोटाला मानवाधिकार आयोग पहुंचा-70 से अधिक युवाओं से लाखों की ठगी, UPHRC ने दर्ज की शिकायत

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बिजनौर मेडिकल कॉलेज भर्ती घोटाला मानवाधिकार आयोग पहुंचा
70 से अधिक युवाओं से लाखों की ठगी, UPHRC ने दर्ज की शिकायत

बिजनौर/लखनऊ | आईरा न्यूज़ नेटवर्क
बिजनौर स्थित महात्मा विदुर स्वायत्त राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में भर्ती के नाम पर हुए कथित बड़े फर्जीवाड़े और आर्थिक शोषण का मामला अब उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। आयोग ने इस गंभीर प्रकरण में शिकायत स्वीकार करते हुए डायरी संख्या 512/IN/2026 आवंटित की है।
यह शिकायत डॉ. तारिक ज़की, जनरल सेक्रेटरी, World Accreditation of Human Rights द्वारा दैनिक अमरउजाला समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार पर संज्ञान लेकर दर्ज कराई गई है, जिसमें समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार के आधार पर आरोप लगाया गया है कि मेडिकल कॉलेज में भर्ती के नाम पर 70 से अधिक युवाओं से ₹1 लाख से ₹3 लाख तक की अवैध वसूली की गई।


शिकायत के अनुसार, युवाओं को फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, क्लर्क, हेल्पर, ऑफिस असिस्टेंट जैसे पदों पर नियुक्ति का झांसा दिया गया। कथित रूप से निजी कंसल्टेंसी कंपनियों के लेटरहेड पर फर्जी नियुक्ति पत्र जारी किए गए, जबकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने ऐसे किसी वैध चयन से इनकार किया।
युवाओं को जॉइनिंग और मेडिकल परीक्षण के लिए कॉलेज बुलाया गया, जिससे उन्हें विश्वास हो गया कि भर्ती वास्तविक है। इसके बाद सामने आया कि पूरा मामला संगठित धोखाधड़ी और आर्थिक शोषण का है।

शिकायत में इसे भारतीय संविधान के:
अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार)
अनुच्छेद 23 (शोषण के विरुद्ध अधिकार)
का सीधा उल्लंघन बताया गया है।
पीड़ित युवाओं को मानसिक उत्पीड़न, आर्थिक क्षति और सामाजिक अपमान का सामना करना पड़ा है। कई युवाओं के सामने बेरोज़गारी और भविष्य का संकट खड़ा हो गया।

मानवाधिकार आयोग से मांग की गई है कि—
पूरे मामले की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
मेडिकल कॉलेज प्रशासन, संबंधित अधिकारियों और निजी एजेंसियों की भूमिका की जांच हो
दोषियों पर आपराधिक व विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए
प्रत्येक पीड़ित को ₹5 लाख मुआवज़ा दिया जाए
भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी हों

आयोग द्वारा शिकायत स्वीकार किए जाने के बाद माना जा रहा है कि जल्द ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की जा सकती है। यह मामला न केवल बिजनौर बल्कि पूरे प्रदेश में सरकारी संस्थानों में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब देखना यह है कि मानवाधिकार आयोग इस कथित भर्ती घोटाले में पीड़ित युवाओं को कितना और कब न्याय दिला पाता है।

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