वाराणसी/उत्तरप्रदेश

प्रेम, बदला और बम धमकी: शंकराचार्य के अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी को मैसेज भेजने वाला LLB छात्र अरेस्ट

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वाराणसी कचहरी को बम से उड़ाने और शंकराचार्य के अधिवक्ता को जान से मारने की धमकी देने के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। Swami Avimukteshwaranand के अधिवक्ता Shrinath Tripathi को धमकी भरा संदेश भेजने वाला आरोपी एक एलएलबी छात्र निकला, जो खुद कचहरी परिसर में रहकर वकालत की पढ़ाई और प्रैक्टिस सीख रहा था।

पुलिस की एसओजी और सर्विलांस टीम की जांच में सामने आया कि आरोपी अजीत कुमार सरोज उर्फ पितु ने यह साजिश निजी रंजिश में रची थी।

प्रेमिका से जुदाई और बदले की योजना

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह एक युवती से प्रेम करता था और दोनों शादी करना चाहते थे। युवती के पिता, जो पेशे से मजदूर हैं, को जब इस रिश्ते की जानकारी हुई तो उन्होंने कड़ा विरोध किया और बेटी को उसकी मां के साथ मुंबई भेज दिया।

प्रेमिका से अलग होने के बाद अजीत ने युवती के पिता को सबक सिखाने की ठान ली। वह चाहता था कि किसी तरह उसके ‘होने वाले ससुर’ को पुलिस गिरफ्तार कर ले। इसी दौरान वाराणसी कचहरी को मिल रही बम धमकियों की खबरों ने उसे साजिश का रास्ता दे दिया।

चोरी का सिम, आधी रात को भेजा मैसेज

योजना के तहत अजीत ने युवती के पिता का मोबाइल चुराया और उसमें से सिम निकाल लिया। बुधवार रात करीब 2:23 बजे उसने वह सिम अपने मोबाइल में डालकर वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी के नंबर पर धमकी भरा संदेश भेजा।

  • मैसेज में लिखा था- “बनारस कचहरी को हम बम से उड़ा देंगे, तुम्हें भी।”

उसे उम्मीद थी कि सिम कार्ड के आधार पर पुलिस सीधे युवती के पिता को पकड़ लेगी और उसका बदला पूरा हो जाएगा।

IMEI ट्रैकिंग से खुली पोल

धमकी मिलने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। एडीएम सिटी और एसीपी कैंट भारी पुलिस बल और बम निरोधक दस्ते के साथ कचहरी पहुंचे और तलाशी अभियान चलाया गया।

शुरुआत में सिम के आधार पर शक युवती के पिता पर गया, लेकिन तकनीकी जांच में पुलिस ने मोबाइल के IMEI नंबर की हिस्ट्री खंगाली। इससे पता चला कि धमकी भेजे जाने के समय सिम किसी दूसरे हैंडसेट में सक्रिय था।

IMEI ट्रैकिंग से खुली पोल

धमकी मिलने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। एडीएम सिटी और एसीपी कैंट भारी पुलिस बल और बम निरोधक दस्ते के साथ कचहरी पहुंचे और तलाशी अभियान चलाया गया।

शुरुआत में सिम के आधार पर शक युवती के पिता पर गया, लेकिन तकनीकी जांच में पुलिस ने मोबाइल के IMEI नंबर की हिस्ट्री खंगाली। इससे पता चला कि धमकी भेजे जाने के समय सिम किसी दूसरे हैंडसेट में सक्रिय था।

सर्विलांस और मुखबिर की सूचना पर पुलिस जंसा थाना क्षेत्र के रैसीपुर निवासी अजीत तक पहुंच गई और उसे गिरफ्तार कर लिया।

कचहरी पर पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां

गौरतलब है कि 13, 16 और 24 फरवरी को भी वाराणसी कचहरी को अज्ञात ई-मेल आईडी से बम धमकियां मिल चुकी हैं। इन मामलों में पुलिस अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।

इसी दहशत भरे माहौल का फायदा उठाकर आरोपी ने निजी रंजिश निकालने की कोशिश की, लेकिन तकनीकी जांच की एक कड़ी ने उसकी पूरी साजिश उजागर कर दी।

Sallauddin Ali

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