प्रतिष्ठित शिकागो साउथ एशियन फिल्म फेस्टिवल 2025 में पहुँची असमीया फिल्म ‘हिराईथ’

गुवाहाटी, 11 अगस्त, 2025: असमीया फीचर फिल्म ‘हिराईथ’ का चयन 16वें शिकागो साउथ एशियन फिल्म फेस्टिवल (सी एस एफ एफ) के प्रतियोगिता श्रेणी में आधिकारिक रूप से किया गया है। फिल्म को चाओ पार्थ बरगोहाइँ ने लिखा, फिल्माया और निर्देशित किया है। यह महोत्सव 14 से 21 सितंबर, 2025 तक आयोजित होगा।
फिल्म ‘हिराईथ’ का वर्ल्ड प्रीमियर शिकागो साउथ एशियन फिल्म फेस्टिवल में विश्वभर की प्रशंसित कृतियों के साथ होगा। महोत्सव का उद्घाटन समारोह 19 सितंबर को शिकागो शहर में रेड कार्पेट पर आयोजित होगा, जबकि समापन समारोह 21 सितंबर को होगा।
मुख्य रूप से डिब्रूगढ़ में फिल्माई गई ‘हिराईथ’ एक सामाजिक यथार्थवाद पर आधारित नाटक है, जो परी नामक एक ग्रामीण महिला की कहानी को दिखाती है। एक विनाशकारी बाढ़ से उसका जीवन बुरी तरह प्रभावित हो जाता है, जिसके कारण उसे और उसके पति को शहर में आना पड़ता है। वहाँ वे सामाजिक-आर्थिक असमानता, भ्रष्टाचार और शोषण की कठोर वास्तविकताओं का सामना करते हैं। मेघाली कलिता, असीम कुमार शर्मा और अतनु महंता की प्रमुख भूमिकाओं वाली यह 100 मिनट की असमीया भाषा की फिल्म समाज के हाशिये पर रहने वाले लोगों के संघर्ष और अन्यायपूर्ण परिस्थितियों को दर्शाती है।
चयन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए निर्देशक चाओ पार्थ बरगोहाइँ ने कहा: “इस फिल्म को मिल रहे सम्मान और प्यार से मैं बेहद भावुक और खुश हूं। जो कहानी हमने बताने की कोशिश की है, वह उन कठोर वास्तविकताओं पर आधारित है जिनका सामना वे लोग करते हैं जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। ये वही लोग हैं जो समाज के हाशिये पर रहते हैं, जिनका पसीना और दर्द कभी-कभी चुपचाप दूसरों की प्रगति का आधार बन जाता है। मैं उन सभी लोगों का आभारी हूं जिन्होंने इस यात्रा में मेरी मदद की, खासकर अपनी दोनों माताओं का — मेरी अपनी मां, जो हमेशा मेरा सहारा रही हैं और मेरी सास, जिन्होंने एक कदम आगे बढ़कर इस फिल्म के वित्त पोषण में मदद की। और मेरी पत्नी का, जिनका भरोसा और प्यार ही वह कारण है जिसकी बदौलत मैं इस काम को पूरा कर पाया।”
उन्होंने आगे कहा, “यह फिल्म उन सभी लोगों के लिए है जो सम्मान के साथ संघर्ष करते हैं और जिन्हें कभी देखा नहीं जाता। परी की यात्रा के माध्यम से, मेरी केवल यही आशा है कि हम उन असमानताओं पर विचार करें जिन्हें हमने सामान्य मान लिया है। प्यार करते रहिए, मेहनत करते रहिए। कोशिश कीजिए कि किसी से नफरत न करें — ज़िंदगी बहुत छोटी है, इसलिए हर पल को मायने दें और उसे पूरी तरह जिएं।”
फिल्म के अन्य कलाकारों में शामिल हैं: दिपांकर शर्मा, अर्चना बेजबरूआ, विश्व किंकर बरूआ, हेमंत राजकोवँर, स्मृतिरेखा चेतिया हेंदीक, प्रदीप्त प्रण भट्टाचार्य, रिमझिम डेका, रूमी शर्मा पाठक और भैरव फुकन।
चाओ पार्थ बरगोहाइँ द्वारा लिखित और निर्देशित इस फिल्म का निर्माण सेंगपेम बरगोहाइँ ने किया है, जबकि शुभित्य बरगोहाइँ और रुची बरूआ कार्यकारी निर्माता हैं। सिनेमैटोग्राफी स्वयं चाओ पार्थ बरगोहाइँ ने की है, प्रोडक्शन डिजाइन जयंत गगै का है, संपादन केविन आदित्य ने किया है, संगीत ए.टी. राम का है। कलरिस्ट के रूप में देलेपन राजन और धीरु, साउंड डिजाइनर नबपन डेका, री-रिकॉर्डिंग मिक्सर ऋत्विक राज पाठक, लोकेशन साउंड बिशाल नाथ, वी एफ एक्स पिक्सल लाइट स्टूडियो, र्ज़ा बोइटलुंग, ध्रुवजित कलिता द्वारा किया गया है। कॉस्ट्यूम और मेकअप आर्टिस्ट परान शर्मा और मंदिता गोस्वामी हैं, जबकि प्रथम सहायक निर्देशक विक्टर दास हैं।
6 दिसंबर 1986 को अरुणाचल प्रदेश के आलॉन्ग में जन्मे चाओ पार्थ बरगोहाइँ ने अपना बचपन अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों में बिताया, क्योंकि उनके पिता अरुणाचल प्रदेश पुलिस सेवा में कार्यरत थे। उनकी मां सेंगपेम बरगोहाइँ, जो अरुणाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारी के रूप में कार्यरत थीं, पार्थ के जन्म के बाद अपनी नौकरी छोड़ दीं और तब से गृहिणी के रूप में परिवार की सेवा करती रहीं। अरुणाचल में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद पार्थ चेन्नई चले गए, जहाँ उन्होंने माद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से विजुअल आर्ट्स में डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने माइंडस्क्रीन फिल्म इंस्टीट्यूट से फिल्म और मोशन फोटोग्राफी में उच्च अध्ययन किया। वर्ष 2014 से पार्थ एक स्वतंत्र सिनेमैटोग्राफर और निर्देशक के रूप में अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।
शिकागो साउथ एशियन फिल्म फेस्टिवल, जो उत्तरी अमेरिका में अपनी तरह का सबसे बड़े महोत्सवों में से एक है, उपमहाद्वीप और प्रवासी समुदाय की विविध कहानियों का उत्सव मनाता है। इसमें फिल्म प्रदर्शन के साथ-साथ प्रश्नोत्तर सत्र, पैनल चर्चा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है।





