“पं. दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद की कल्पना और पुनर्कल्पना” विषय पर विशेष व्याख्यान

वाराणसी ।, 24.02.2026। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संबोधि सभागार, सामाजिक विज्ञान संकाय, में पंडित दीन दयाल उपाध्याय पीठ द्वारा “पं. दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद: कल्पना और पुनर्कल्पना” विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसका उद्देश्य विशेषकर शिक्षा, राष्ट्र-निर्माण एवं सतत विकास के संदर्भ में समकालीन समाज के एकात्म मानववाद की दार्शनिक एवं व्यावहारिक प्रासंगिकता का विश्लेषण करना था।
व्याख्यान के मुख्य वक्ता प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, गया के कुलपति रहे। उन्होंने कहा कि तीन दशकों से अधिक शैक्षणिक एवं प्रशासनिक अनुभव के आधार पर शिक्षा के मूल्यों, उत्तरदायित्व और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व के समग्र विकास का माध्यम होनी चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों एवं व्यावहारिक जीवन कौशल का संवर्धन करते हुए राष्ट्र-निर्माण के प्रति सेवा-भाव और प्रतिबद्धता विकसित करना होना चाहिए।
प्रो. सिंह ने भारत की समृद्ध प्राकृतिक एवं बौद्धिक संपदा, विशेषकर गंगा के मैदानी क्षेत्रों के महत्त्व का उल्लेख करते हुए “Think Globally, Act Locally” के सिद्धांत के अनुरूप सतत एवं समावेशी विकास की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने तकनीकी प्रगति और सामाजिक समानता के मध्य बढ़ती खाई पर चिंता व्यक्त करते हुए वंचित वर्गों के सशक्तिकरण पर बल दिया।
कार्यक्रम का संयोजन पं. दीनदयाल उपाध्याय अध्ययन पीठ के समन्वयक प्रो. ताज प्रताप सिंह द्वारा किया गया।
























