“गांव की पंचायत में नई हवा या पुरानी दवा..? – शहजाद मलिक चुनावी दंगल में”-पत्रकारिता और समाजसेवा “दोनों का कंबो पैक”

आईरा न्यूज़ नेटवर्क – नजीबाबाद विशेष
“गांव की पंचायत में नई हवा या पुरानी दवा..? – शहजाद मलिक चुनावी दंगल में”
ग्राम पंचायत कमालपुर खाईखेड़ी में इन दिनों सबसे ज़्यादा गूंज रहा नाम है पत्रकार से समाजसेवी बने शहजाद मलिक का। ग्रामीण कहते हैं – “ये हमारे गाँव का ब्रेकिंग न्यूज़ हैं, जो हर गली-कूचे में वायरल हो चुका है।”
शहजाद मलिक ने वर्षों तक कलम से लड़ाई लड़ी, सड़क से लेकर नाली तक की ख़बरें लिखीं। अब वही कलम छोड़कर प्रधान की कुर्सी पर नज़रें गड़ाए बैठे हैं। गांव वाले चुटकी लेते हैं – “कल तक ख़बर छापते थे, अब खुद हेडलाइन बनने चले हैं।”
शहजाद मलिक ने ऐलान किया है कि वे गरीब बच्चों की पढ़ाई, युवाओं के खेल, महिलाओं की सुरक्षा, किसानों की खेती और यहां तक कि गांव की नालियों तक का ख्याल रखेंगे।
एक बुज़ुर्ग बोले – “बेटा! अगर ये सब हो गया तो हमारी खाईखेड़ी, खाईखेड़ी नहीं खाड़ी देश लगने लगेगी।”
वही युवाओं और महिलाओं की पहली पसंद बनने पर युवाओं का कहना है – “शहजाद भाई हमें रोजगार दिलाएँगे।”
महिलाएँ बोलीं – “शहजाद भाई बिना पद पर रहते हमारी पेंशन बनवा देते थे, अब प्रधान बन गए तो पेंशन के साथ बोनस भी मिलेगा।”
हर तरफ ‘मलिक’ ही मलिक
गांव के हलक़े में चर्चा है कि शहजाद मलिक के पास पत्रकारिता का तजुर्बा है साथ ही समाजसेवा की पहचान, बल्कि अब तो “दोनों का कंबो पैक” है। स्थानीय पंडिताई में भी कयास यही है कि इस बार गांव की गद्दी पर “पत्रकार प्रधान” की एंट्री तय मानी जा रही है।
“गांव की टूटी सड़कें ठीक होंगी या नहीं, ये तो वक्त बताएगा।
पर इतना पक्का है कि चुनाव तक हर गली में मलिक साहब की ब्रेकिंग न्यूज़ चलती रहेगी























