गणतंत्र को स्वस्थ और सशक्त बनाने हेतु ज्ञानामृत है गीता,सनबीम स्कूल भगवानपुर में गीता का उद्घोष

वाराणसी :- महामना मालवीय स्मृति संस्कार पुस्तकालय के सौजन्य से सनबीम स्कूल भगवानपुर द्वारा आयोजित गीता ज्ञान एवं भारतीय संस्कृति ज्ञान प्रतियोगिता में बच्चों ने बड़े उत्साह से भाग लिया | गीता श्लोक गायन प्रतियोगिता में प्रतिभागियों की श्रद्धा,शैली तथा आत्मविश्वास को देखकर बाह्य परीक्षक तथा इन प्रतियोगिताओं के मुख्य संयोजक चीफ फार्मासिस्ट ऑफिसर एवं गीता ज्ञान शिक्षक अखिलेश कुमार राय ने प्रशंसा करते हुए कहा कि इस सुप्रशिद्ध विद्यालय के बच्चों में गीता के प्रति रुचि हम सभी के लिए प्रेरणादायक और उत्साहवर्धक है |
दशकों से सुयोग्य नागरिकों का सृजन करते हुए राष्ट्र निर्माण में अग्रणी योगदान देने वाले इस सुप्रशिद्ध विद्यालय में संस्कार सिंचन,सांस्कृतिक जीवन मूल्यों के प्रति समर्पण तथा राष्ट्र सर्वोपरि की भावना को बच्चों के हृदय में आरोपित करने के लिए विद्यालय प्रबंधन,प्रशासन एवं शिक्षकगण सहित संपूर्ण विद्यालय परिवार की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे पवित्र और उत्कृष्ट वातावरण में अध्ययन का सौभाग्य बच्चों के तेजस्वी व्यक्तित्व में साफ झलकता है जहाँ पर प्रतिभा विकास के साथ ही हृदय में पवित्रता का प्रकाश भी निखरता है और ऐसे ही बच्चे माँ भारती के संस्कारों से पोषित होकर महामना के रतन बनेंगे तथा विकसित भारत का संकल्प सिद्ध करने में अग्रणी भूमिका निभाते हुए घर परिवार विद्यालय तथा समाज का गौरव बनेंगे उन्होंने बताया कि दिसंबर माह में गीता जयंती से आरंभ होकर महामना जयंती महोत्सव मनाते हुए अब तक शहर के तीस विद्यालयों में आयोजित इन प्रतियोगिताओं में स्वेच्छा से सहभाग करने वाले प्रतिभागियों की संख्या 14000 तक पहुंच गई है और बच्चों की जबरदस्त भागीदारी ने इसे एक “बाल संस्कार जागृति अभियान” का रूप दे दिया है जिसका भाव है संस्कारित पीढ़ी सशक्त राष्ट्र |
प्रतिभा से लबालब भरे हुए युवाओं के देश भारत से संपूर्ण विश्व को उम्मीद है परन्तु यह तब चरितार्थ होगा जब हमारी नई पीढ़ी तन मन और बुद्धि से स्वस्थ एवं सशक्त हो,उसके व्यक्तित्व में अपनी दिव्य संस्कृति की सुगंध हो,नेतृत्व कौशल हो, जीवन के प्रति दृष्टि बड़ी हो,लोक मंगलकारी भाव से पुष्ट सुंदर सपने हों मैं मेरा से उपर उठकर संपूर्ण समाज व समग्र राष्ट्र कल्याण हेतु हृदय में तड़प हो | इसके लिए नई पीढ़ी के विचारों में निर्मलता और उत्तम संस्कार के प्रति जागरूकता बहुत जरुरी है जिसके लिए गागर में सागर जैसी अद्भूत पुस्तक है भगवद्गीता जो मानसिक एकाग्रता व नैतिक मूल्यों को बढ़ाकर एवं सामाजिक समता समरसता और निष्पक्षता तथा कर्मयोग की प्रेरणा देकर श्रेष्ठ व्यक्तित्व निर्माण से उत्तम समाज निर्माण और स्वस्थ-सशक्त राष्ट्र निर्माण के लिए ज्ञानामृत है |
भारत में जन्म लेकर हमारी नई पीढ़ी इस अमृत से वंचित ना रहे इसलिए बादल बनकर नई पीढ़ी के बीच गीता ज्ञान की वर्षा करना यही हमारा लक्ष्य है उन्होंने भारतरत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय तथा युवाओं के प्रेरणाश्रोत स्वामी विवेकानंद के जीवन से प्रेरणा लेने के लिए बच्चों का आह्वान करते हुए कहा कि संस्कृत भाषा का अमृत पीयें और अपनी संस्कृति को जी भर के जीयें | गीता का एक श्लोक रोज पढ़ें और शूर वीर बनके आगे बढ़े | प्राचार्या मौसमी भट्टाचार्या एवं नौरीन खान सहित सभी शिक्षकों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे महत्वपूर्ण बताया ||






