काशीपुर-उत्तराखण्ड़

किसानों ने मंडी गेट पर ज्यादा ताला, धान खरीद मामले में गुस्साए किसानों ने किया हंगामा

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काशीपुर / उत्तराखंड,,, खरीफ सीजन की धान खरीद को लेकर किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिली। गुरुवार सुबह काशीपुर मंडी समिति में तब हंगामा खड़ा हो गया जब धान की खरीदारी ना होने से गुस्साए किसानों ने मंडी समिति के मुख्य मार्ग पर तालाबंदी कर दी। धरना प्रदर्शन करते हुए किसानों ने एफसीआई (भारतीय खाद्य निगम) के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए तत्काल धान की खरीद शुरू करने की मांग की। सुबह चार बजे से ही सैकड़ों किसान अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में धान से भरी बोरियां लेकर मंडी समिति के बाहर पहुंचे, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी खरीद शुरू नहीं हुई। इससे नाराज किसानों ने मंडी समिति के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और नारेबाजी शुरू कर दी।
मौके पर पहुंचे मंडी सचिव तथा एफसीआई अधिकारी दिनेश कुमार ने किसानों को समझाने की कोशिश की, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे। उन्होंने साफ कहा कि जब तक उनकी फसल की खरीद शुरू नहीं होती, तब तक वह मुख्य गेट नहीं खोलेंगे।
किसानों ने कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण उनकी फसल खेतों में और सड़कों पर सड़ रही है। उनका कहना है कि अभी तक केवल 60% फसल की ही कटाई हुई है, जबकि 40% धान की फसल अभी भी खेतों में खड़ी है। बावजूद इसके, उत्तराखंड सरकार ने धान खरीद का पोर्टल बंद कर दिया है, जिससे किसान भारी संकट में हैं।
किसानों का कहना है कि अगर सरकार ने पोर्टल तुरंत नहीं खोला तो उन्हें अपनी फसल लेकर कहां जाना पड़ेगा? अगले सीजन की बुवाई भी सिर पर है और इस हालात में वे दोहरी मार झेल रहे हैं — एक तरफ धान की बिक्री बंद, दूसरी तरफ नई फसल की तैयारी ठप।
किसानों ने सरकार से मांग की है कि धान खरीद पोर्टल को तत्काल खोला जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
मौके पर मौजूद किसानों में बक्शोरा के पूर्व ग्राम प्रधान सुखदेव सिंह, कुलवंत सिंह, मेजर सिंह, मोहम्मद सलीम, मनोज पाल, सरजीत सिंह, गुरमीत सिंह, हरप्रीत सिंह, रनजोत सिंह, गजेंद्र सिंह, गुरमुख सिंह, नवल सिंह, राजवंत सिंह, गुरप्यार सिंह, हरचरण सिंह, मिल्खा सिंह, मेघनाथ सिंह, धर्म सिंह, रणवीर सिंह, हरपाल सिंह, बबलप्रीत सिंह, गुरमीत सिंह, मेव लाल सिंह, गुरबख्श सिंह, हरप्रीत सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
किसानों की आवाज अब सरकार तक पहुंचेगी या अनाज सड़क पर सड़ता रहेगा — यह सवाल अब भी खुला है।

RIZWAN AHSAN

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