वाराणसी/उत्तरप्रदेश

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में सम्पन्न हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा

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वाराणसी, । काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के एम्फीथिएटर ग्राउंड में आज सायं 4:00 बजे अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का गरिमामय आयोजन सम्पन्न हुआ। साहित्यिक वातावरण से ओतप्रोत इस आयोजन में देश के प्रतिष्ठित एवं ख्यातिप्राप्त कवियों और शायरों ने अपनी प्रभावशाली काव्य प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का संचालन राहुल अवस्थी द्वारा अत्यंत सधे हुए एवं प्रभावशाली ढंग से किया गया। उन्होंने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित और रोचक बनाए रखा।
इस अवसर पर कुलगीत की प्रस्तुति भी की गई, जिससे पूरे सभागार में गरिमामय वातावरण का निर्माण हुआ।
मुख्य अतिथि जगदीश पंथी जी सहित सभी आमंत्रित कवियों का स्वागत माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र (चादर) भेंट कर किया गया। विश्वविद्यालय परिवार की ओर से सभी अतिथियों का औपचारिक सम्मान किया गया।
कार्यक्रम के दौरान स्पंदन के विजेता कवियों को सम्मानित भी किया गया।
विशेष उल्लेखनीय रहा कि चार में से तीन स्थान छात्राओं ने प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

इसी क्रम में एक एक सारे कवियों ने अपनी प्रस्तुति रखी ।

सशक्त कवि जगदीश पंथी ने मंच संभालते ही वातावरण को फागुनी रंगों से सराबोर कर दिया। उन्होंने बड़े ही सहज और आत्मीय अंदाज़ में कहा कि “फागुन आने वाला है”, और इसी भावभूमि पर अपनी पहली प्रस्तुति दी।
उन्होंने अपनी भोजपुरी कविता की पंक्तियाँ सुनाईं—
“चइती फसल गदेल,
फगुनवा गाँव में आइल…”

इसके पश्चात उन्होंने एक मधुर लोकगीत प्रस्तुत किया, जिसकी पंक्तियाँ थीं—
“रुनक झुनक बाजे पायल तोरे पउआ ,
बड़ा निक लागे ननद तोरे गऊआ..

कवि सम्मेलन के इस गरिमामय आयोजन में मंच पर अगली प्रस्तुति दी प्रख्यात कवयित्री डॉ. मीनाक्षी दुबे ने।

उन्होंने अपने काव्य-पाठ की शुरुआत एक मधुर गीत से की, जिसकी पंक्तियाँ थीं—

“प्रिया तुम्हारे आगमन से धन्य जीवन हो गया…”

इसके पश्चात उन्होंने एक ग़ज़ल सुनाई, जिसकी पंक्तियाँ थीं—

“चाहत नहीं मिलती यहाँ, दौलत नहीं मिलती,
कोई हुनर न हो तो शोहरत नहीं मिलती…”

इसके पश्चात मंच पर आमंत्रित किया गया कवयित्री सोनरूपा विशाल को।
उनकी प्रस्तुति में भावनाओं की गहराई और प्रेम की जटिलता का अत्यंत सूक्ष्म चित्रण देखने को मिला।

उन्होंने अपने काव्य-पाठ में कहा—
“दर्द का आकलन नहीं होता,
इसमें कोई चयन नहीं होता।
प्यार में डूबना ही पड़ता है,
प्यार में आज़मन नहीं होता।”

कवि सम्मेलन में देवमणि पांडेय ने अपनी प्रभावशाली शायरी से श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया।

उन्होंने पढ़ा—

“इस जहाँ में प्यार महके, ज़िंदगी बाक़ी रहे,
ये दुआ माँगो दिलों में रौशनी बाक़ी रहे।
आदमी पूरा हुआ तो देवता हो जायेगा,
ये ज़रूरी है कि उसमें कुछ कमी बाक़ी रहे।”

कवि सम्मेलन में विद्वान कवि राहुल अवस्थी ने अपने प्रेरक और दार्शनिक स्वर से श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया।

उन्होंने जीवन-संघर्ष पर आधारित पंक्तियाँ सुनाईं—

“यूँ जीवन जीना आसान नहीं होता,
कोई बिन संघर्ष महान नहीं होता।
चोट हथौड़े की न पड़े जब तक तब तक,
पत्थर पत्थर से भगवान नहीं होता।”

कवि सम्मेलन में विद्वान कवि वशिष्ठ अनूप ने अपनी ओजपूर्ण और आत्मसम्मान से भरी रचना से श्रोताओं को प्रेरित किया।
उन्होंने पढ़ा—

“परख इंसान की होती है अक्सर दो ही मौके पर,
कहीं छोड़ी नहीं ख़ुद्दारी, कहीं झुकना नहीं छोड़ा।”

आगे उन्होंने संघर्ष और संकल्प की भावना व्यक्त करते हुए कहा—

“थके थे पाँव, मंज़िल दूर थी, राहें थीं पथरीली,
वचन खुद को दिया था, इसलिए चलना नहीं छोड़ा।”

कवि सम्मेलन में शायर मनीष बादल ने अपनी भावपूर्ण शायरी से माहौल को संवेदनशील बना दिया।
उन्होंने पढ़ा—
“बाग़-ए-दिल में जाने कितना गुल खिले, मुरझा गए,
जो था पहला गुल खिला, बस वो खिला है आज तक।
वो न रुसवा हो कमी है सोचकर लब सी लिए,
बस तभी से शायरी का सिलसिला है आज तक।”

कवि सम्मेलन में युवा शायर अंकित मौर्य ने अपनी मार्मिक शायरी से श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया।
उन्होंने पढ़ा—
“शिद्दत से मुझसे हाथ छुड़ाने के बावजूद,
थोड़ा सा रह गया है वो जाने के बावजूद।”
“कोई सवाल ज़िंदगी का हल नहीं हुआ,
पढ़ने में सारी उम्र गंवाने के बावजूद।”

कवि सम्मेलन में कुमार विकास (इलाहाबाद) ने विरह और प्रतीक्षा की भावनाओं को स्वर देते हुए पढ़ा—
“ये सर्दी बीत जायेगी, क्या इसके बाद आओगे,
हमदम बताओ कब इलाहाबाद आओगे”,

वहीं डॉ विनम्र सेन सिंह (प्रयागराज) ने बदलते समय और निरंतर गतिशील जीवन पर कहा—
“सही शहर गाँव-गाँव बनते बिगड़ते हैं रोज,
नई डगर नया सफर चुनते हैं, चलते हैं रोज़”।

अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर रंजन कुमार सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने सभी आमंत्रित कवियों, अतिथियों एवं उपस्थित श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का संयोजन प्रो. वशिष्ठ अनुप द्वारा किया गया, जिनके कुशल मार्गदर्शन एवं प्रयासों से यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

Sallauddin Ali

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