वाराणसी/उत्तरप्रदेश

एआई युग में राष्ट्र-निर्माण का मंत्र, ज्ञान गंगा मंच पर युवाओं के भविष्य को गढ़ने पर मंथन

IMG-20260127-WA0039
previous arrow
next arrow

वाराणसी:- बनारस लिटरेचर फेस्टिवल–4 के तीसरे दिन ज्ञान गंगा मंच पर ‘यूथ शेपिंग नेशन इन एन एआई-पावर्ड वर्ल्ड’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा ने युवाओं, तकनीक और राष्ट्र-निर्माण के गहरे अंतर्संबंधों को उजागर किया | कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में भारत के युवा किस दिशा में आगे बढ़ें, इस प्रश्न पर विचारों की एक सशक्त धारा प्रवाहित हुई | इस महत्वपूर्ण पैनल चर्चा में पारिजात चक्रवर्ती, अभिजीत राय,कश्यप कोम्पेला और सुबोर्नो इसाक बारी ने अपने विचार रखे | चर्चा का कुशल संचालन प्रो.(डॉ.) धवल मेहता ने किया जिन्होंने संवाद को युवाओं की जिज्ञासा और समकालीन चुनौतियों से जोड़े रखा |

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अनिरुद्ध मिश्रा ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्र के भविष्य के लिए सबसे बुनियादी पाठ्यक्रम केवल डिग्रियों तक सीमित नहीं होना चाहिए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि युवाओं के लिए तीन मूल स्तंभ अनिवार्य हैं स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और स्वस्थ दृष्टिकोण | उन्होंने कहा कि दुनिया भर में यह देखा गया है कि सफलता केवल सपने देखने से नहीं,बल्कि उन्हें ज़मीन पर उतारने की क्षमता से मिलती है |

श्री मिश्रा ने युवाओं को असफलताओं से न डरने की सलाह देते हुए कहा कि असफलता जीवन की सबसे बड़ी शिक्षक होती है उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे जीवन के किसी भी पड़ाव पर माँ के हाथ का भोजन सबसे विश्वसनीय होता है वैसे ही मूल मूल्य और अनुशासन कभी नहीं बदलते,चाहे दुनिया कितनी भी आधुनिक क्यों न हो जाए |

पैनलिस्टों ने भी इस बात पर सहमति जताई कि एआई और तकनीक युवाओं के लिए केवल अवसर नहीं,बल्कि जिम्मेदारी भी लेकर आई है | सही दिशा,नैतिकता और मानवीय मूल्यों के साथ यदि तकनीक का उपयोग किया जाए,तो युवा न केवल अपना भविष्य,बल्कि राष्ट्र का भविष्य भी संवार सकते हैं | ज्ञान गंगा मंच पर हुआ यह संवाद केवल तकनीक की चर्चा नहीं था, बल्कि वह दृष्टि थी जिसमें मानवता,मूल्य और आधुनिकता एक साथ चलने का संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया ||

Sallauddin Ali

50% LikesVS
50% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
close