असम/गुवाहाटी

असम सरकार और द हंस फाउंडेशन मिलकर करेंगे टी गार्डन मॉडल स्कूलों में संगीत प्रतिभा की खोज

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गुवाहाटी, जनवरी 3, 2026: चाय बागान समुदायों में समग्र शिक्षा को सशक्त बनाने के अपने निरंतर प्रयासों के तहत, द हंस फ़ाउंडेशन ने असम सरकार के माध्यमिक शिक्षा विभाग के सहयोग से राज्य के चाय बागान क्षेत्रों में स्थित मॉडल स्कूलों में एक बड़े पैमाने पर संगीत प्रतिभा खोज और मेंटरशिप पहल की घोषणा की है।
यह पहल शोनितपुर, तिनसुकिया और डिब्रूगड़ जिलों के चाय बागान क्षेत्रों में स्थित 54 मॉडल स्कूलों को कवर करती है, जिसे द हंस फाउंडेशन और असम सरकार के संयुक्त सहयोग से लागू किया जा रहा है। वर्तमान में यह फाउंडेशन इन स्कूलों को अपने ‘उत्तम शिक्षा’ कार्यक्रम के तहत समर्थन प्रदान कर रहा है, जिसका उद्देश्य चाय जनजाति के बच्चों के लिए शिक्षा तक पहुँच, गुणवत्ता और शैक्षणिक परिणामों में सुधार करना है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत शामिल स्कूलों की संख्या अप्रैल तक बढ़कर 101 हो जाएगी।
4 अप्रैल 2025 को आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान, असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिश्व शर्मा ने चाय बागान समुदायों से आने वाले छात्रों के सर्वांगीण विकास को समर्थन देने के लिए इन स्कूलों में संगीत शिक्षा सहित संरचित सह-पाठ्यक्रम और व्यावसायिक गतिविधियों को शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन के अनुरूप, द हंस फाउंडेशन ने सभी 54 मॉडल स्कूलों में औपचारिक संगीत शिक्षा कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिसके तहत प्रत्येक विद्यालय में समर्पित संगीत शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। पिछले कई महीनों में इन स्कूलों में साप्ताहिक, द्वि-साप्ताहिक और त्रि-साप्ताहिक संगीत कक्षाओं के माध्यम से 14,000 से अधिक चाय जनजाति के छात्रों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की है।
इस पहल को आगे बढ़ाते हुए, द हंस फाउंडेशन ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के सहयोग से अब राज्य-स्तरीय संगीत प्रतियोगिता आयोजित करने की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य इन छात्रों के बीच असाधारण संगीत प्रतिभा की पहचान करना और उसे प्रोत्साहित करना है। इस पहल का लक्ष्य केवल संगीत प्रतिभा को पहचानना ही नहीं, बल्कि छात्रों को औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ सह-पाठ्य गतिविधियों में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना भी है।
कार्यक्रम के तहत अगले एक महीने के दौरान सभी भाग लेने वाले मॉडल स्कूलों में ऑडिशन आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद सोनितपुर, तिनसुकिया और डिब्रूगढ़ जिलों में जिला-स्तरीय चयन प्रक्रिया होगी, जिसमें से 160 विद्यार्थियों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। इसके पश्चात 21 जनवरी को डिब्रूगढ़ में एक प्री-स्टेट प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जहां से शीर्ष 15 विद्यार्थियों का चयन उन्नत मेंटरशिप के लिए किया जाएगा।
इन चयनित प्रतिभागियों को गहन प्रशिक्षण और मार्गदर्शन सत्रों के लिए गुवाहाटी लाया जाएगा, जिसके बाद 6 फरवरी को भव्य फिनाले आयोजित किया जाएगा, जहां शीर्ष पाँच छात्रों की घोषणा की जाएगी।
जुरिस्मिता पूजारी, प्रोग्राम मैनेजर, नॉर्थ ईस्ट, द हंस फाउंडेशन ने कहा, “द हंस फाउंडेशन में हमारा मानना है कि बच्चों को वास्तव में सशक्त बनाने के लिए शिक्षा का दायरा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं होना चाहिए। संगीत आत्म-अभिव्यक्ति, आत्मविश्वास बढ़ाने और अनुशासन विकसित करने का एक सशक्त माध्यम साबित हुआ है, विशेष रूप से हाशिए पर रहने वाले समुदायों के बच्चों के लिए। हमारे संगीत कक्षाओं में 14,000 से अधिक चाय बागान क्षेत्रों के छात्रों की उत्साहपूर्ण भागीदारी इस विश्वास को और मजबूत करती है कि प्रतिभा सर्वत्र मौजूद है, भले ही अवसर सभी को समान रूप से न मिलें। इस प्रतिभा खोज और मार्गदर्शन कार्यक्रम के माध्यम से, हमारा उद्देश्य योग्य बच्चों को एक मंच, दीर्घकालिक शैक्षणिक सहयोग और ऐसा अवसर प्रदान करना है जो उनके जीवन को सकारात्मक रूप से बदल सके।”
विजेताओं को स्नातकोत्तर स्तर तक की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही उन्हें मुंबई स्थित प्रसिद्ध भारतीय पार्श्व गायक सुरेश वाडकर के संगीत संस्थान का एक्सपोज़र विज़िट कराने के साथ-साथ अन्य पुरस्कार और सम्मान भी दिए जाएंगे।
“असम सरकार विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है, विशेष रूप से चाय बागान समुदायों से आने वाले छात्रों के लिए। इन मॉडल स्कूलों में संगीत जैसी सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को शामिल करना इसी दृष्टिकोण को दर्शाता है। उत्तम शिक्षा कार्यक्रम के तहत द हंस फाउंडेशन के साथ सहयोग ने ज़मीनी स्तर पर शैक्षणिक परिणामों को मज़बूत किया है और संगीत प्रतिभा की पहचान एवं संवर्धन की यह पहल छात्रों को कक्षा से परे उत्कृष्टता हासिल करने के लिए और अधिक प्रेरित करेगी,” सुश्री ममता होजाई, निर्देशक, माध्यमिक शिक्षा, असम सरकार।
इस पहल के माध्यम से द हंस फाउंडेशन का उद्देश्य चाय जनजाति के बच्चों की छिपी हुई प्रतिभाओं को सामने लाने के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करना, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में निरंतर भागीदारी को प्रोत्साहित करना तथा आत्मविश्वास, रचनात्मकता और भविष्य के अवसरों के निर्माण में कला शिक्षा की भूमिका को और मजबूत करना है।
यह कार्यक्रम असम सरकार के माध्यमिक शिक्षा विभाग और द हंस फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से क्रियान्वित किया जा रहा है, जो चाय बागान समुदायों के बच्चों के लिए समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

HALIMA BEGUM

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