अच्छी शिक्षा,अच्छे शिक्षक: आधुनिक मार्गदर्शक के रूप में स्वामी विवेकानंद की दृष्टि” विषय पर कार्यक्रम का आयोजन

वाराणसी :- अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) वाराणसी में विवेकानंद जयंती समारोह के उपलक्ष्य में“अच्छी शिक्षा,अच्छे शिक्षक: आधुनिक मार्गदर्शक के रूप में स्वामी विवेकानंद की दृष्टि” विषय पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया | कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण से हुई जिसे डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी द्वारा प्रस्तुत किया गया | इसके उपरांत दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती,महामना पंडित मदन मोहन मालवीय एवं स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई | कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो.जय प्रकाश लाल कुलाधिपति झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड रहे |
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. पवन कुमार शर्मा,आचार्य,राजनीति विज्ञान विभाग,चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ रहे | कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो.प्रेम नारायण सिंह निदेशक आईयूसीटीई वाराणसी ने की | प्रो.आशीष श्रीवास्तव डीन (शैक्षणिक एवं अनुसंधान) आईयूसीटीई वाराणसी ने स्वागत उद्बोधन किया |
मुख्य अतिथि प्रो.जय प्रकाश लाल कुलाधिपति झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के अनुसार युवाओं में तीन प्रमुख गुण: आत्मबल एवं आत्मविश्वास,चरित्र निर्माण और शिक्षा तथा मानवता की निःस्वार्थ सेवा,अवश्य होने चाहिए उन्होंने ‘पावर ऑफ माइंड’ पुस्तक का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे मानसिक शक्ति,आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच विकसित करने की प्रेरणा मिलती है साथ ही उन्होंने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के विचारों को जीवन में अपनाकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया |
मुख्य वक्ता प्रो.पवन कुमार शर्मा,आचार्य, राजनीति विज्ञान विभाग,चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय,मेरठ ने कहा कि स्वामी विवेकानंद सही मायनों में एक महान द्रष्टा थे उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 मूलतः स्वामी विवेकानंद के शिक्षा संबंधी विचारों का ही प्रसार है उनके अनुसार सच्चा शिक्षक वह होता है जो अहंकार से मुक्त हो जिसका अपना कुछ न हो और जो विद्यार्थी के मन को पढ़ सके उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा का मुख्य उद्देश्य चरित्र निर्माण है | अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो.प्रेम नारायण सिंह निदेशक आईयूसीटीई वाराणसी ने सभी का अभिनंदन करते हुए कहा कि जब शिक्षक अच्छा होगा तभी शिक्षा अच्छी होगी और अच्छा शिक्षक बनने के लिए शिक्षा का सुदृढ़ होना आवश्यक है ये दोनों बातें एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं |
इस अवसर पर “प्रमा जर्नल के प्रथम संस्करण” का उद्घाटन तथा ‘शैक्षिक मनोविज्ञान’ नामक पुस्तक का अनावरण किया गया | विद्वज्जनों ने प्रमा जर्नल के प्रथम संस्करण के प्रकाशन पर संपादक मंडल के सभी सदस्यों तथा सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष को हार्दिक बधाई दी |
इस कार्यक्रम का समन्वयन डॉ.सुनील कुमार त्रिपाठी,सहायक आचार्य आईयूसीटीई द्वारा किया गया | इस कार्यक्रम में प्रो.दीनानाथ, प्रो.के.के.शर्मा, प्रो.संजीव आचार्य, डॉ.राजेश कुमार यादव, डॉ.दिनेश कुमार एवं डॉ.संतोष पटेल सहित विभिन्न संस्थानों और विश्वविद्यालयों के गणमान्य शिक्षाविद् तथा केंद्र के अन्य समस्त संकाय सदस्य एवं कर्मचारी उपस्थित रहे ||






